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  • शैक्षिक उन्नयन

    कठिन विषय जैसे विज्ञान, गणित, एकाउन्ट, अंग्रेजी के प्रतिदिन दो वादनों के अध्यापन की व्यवस्था








  • श्रेष्ठ अनुशासन

    अध्ययन, खेलकूद, सामूहिक कार्यक्रम, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रतिभाग कराते हुए अनुशासित रहने का प्रयास करना।








  • राष्ट्रीयता का विकास

    छात्रों में देश प्रेम व समाज सेवा का भाव जगाने के लिये विद्यालय में रा0 से0 यो0 (N.S.S.) प्रारम्भ किया।

संदेश

प्रिय छात्रों,

            नये सत्र के प्रारम्भ में मैं आपसे कहना चाहता हूं कि जीवन में कुछ भी बनने से पूर्व यह जानना आवश्यक है कि आप बनना क्या चाहते है, अर्थात सर्वप्रथम आप अपने लक्ष्य का निर्धारण करें और फिर उसके लिए एक योजना बनायें।

योजना बनाने के पश्‍चात योजना पर कार्य करना प्रारंभ कर दें और लक्ष्य प्राप्‍त होने तक लगातार प्रयत्न करते रहे, इसमे सबसे महत्वपूर्ण तत्व है हार स्वीकार किए बिना लगातार प्रयत्न करना।

इस बात से न डरें कि आप असफल हो सकतें हैं, बल्कि इस बात से डरें कि यदि आप कभी कोशिश नहीं करेंगें और जोखिम नही लेंगें तो आप कभी सफल नही होंगे। अपने जीवन की बाधाओं को अपने लक्ष्य की बाधा न बनने दें।

जीवन का विरोधाभास यह है कि सफलता का महल कभी सुविधा की नींव पर नही बनता है। यह तो असुविधा की नींव पर बनता है। जो लोग संघर्ष करने और उसके द्वारा विकाश करने के लिए तैयार होते हैं, वे जीत जाते हैं। जो लोग ऐसा करने के लिए तैयार नही होते हैं, वे हार जाते हैं। अपनी समस्याओं के बजे अपनी गुणों को गिने और हमेश सपनों के लेए संघर्ष करें। दरअसल इससे कोई फ़र्क नही परता कि आप कहा से आये हैं, महत्वपूर्ण बात तो यह है कि आप कहा जा रहे हैं?

आप अपनी जिन्दगी के रचयिता बन सकते है या फिर आप अपनी परिस्थितियों के शिकार बन सकते हैं। यह आप आर निर्भर करता है। याद रखें "हममें से कोई भी अपने अतीत को नही बदल सकता, लेकिन हम सभी अपने भविष्य को अवश्य बदल सकते है। और हाँ! कोशिश करने वालों की कभी हार नही होती।"


सभी छात्रों को शुभकामनाओं सहित।

डा0 सतीश अरोरा

     प्रधानाचार्य



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